
गर्मी के तेवर दिखाते ही सूबे में बिजली की खपत भी बढ़ने लगी है। अधिकतम तापमान भी करीब 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच चल रहा है। इससे बिजली की मांग भी बढ़ गई है। रविवार काे मांग 7 हजार मेगावाट के पार रिकॉर्ड हुई। बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही गांवों में 8-8 घंटे के बिजली कट लगाना शुरू हाे गए हैं।
निगम अधिकारियों का तर्क यह कि फसल पकी हुई है, आग की चिंगारी न गिर जाए इसलिए कट लगा रहे हैं। आज 17 जिलों के 84 फीडरों पर बिजली कट रिपेयरिंग और फाल्ट ठीक करने के नाम पर लगे। शाम साढ़े 4 बजे तक 16 हजार से ज्यादा शिकायतें रजिस्टर्ड हुईं, इनमें 11 हजार 107 का ठीक हो पाईं जबकि 17 हजार 354 का निपटारा नहीं हाे पाया।
इनमें 11 हजार 303 शिकायतें पिछले दिन की भी शामिल हैं। बिजली निगम अधिकारियों की मानें तो आठ दिनों में बिजली की मांग 12 हजार मेगावाट बढ़ी है।
420 सेल्सियस के करीब पहुंचा सूबे का तापमान
7 अप्रैल को 5900 मेगावाट थी बिजली की डिमांड, अब 7 हजार मेगावाट तक पहुंची…
7 अप्रैल काे बिजली की अधिकतम मांग 5900 मेगावाट थी, अब साढ़े 7 हजार मेगावाट तक पहुंच चुकी है। हर साल सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में अप्रैल में औसतन 100 से 200 यूनिट बिजली की खपत होती है,जो इस बार 180 से 300 यूनिट तक हाे सकती है। ऐसे में इस बार अप्रैल-मई क्योंकि उपभोक्ता ठंडक के लिए बिजली के उपकरणों का सहारा लेना ही पड़ेगा। एक मध्यमवर्गीय परिवार में चलने वाले न्यूनतम उपकरणों की बात करें तो राेजाना 2.5 किलोवाट तक का लाेढ एक मीटर पर पड़ता है।
घरेलू, कृषि व व्यावसायिक को मिलाकर पंजाब में 1 करोड़ के करीब हैं उपभोक्ता
घरेलू, कृषि, व्यवसाय समेत अन्य उपभोक्ताओं काे मिलाकर करीब 1 करोड़ उपभोक्ता हैं। घराें से लेकर दुकानाें, निजी और सरकारी दफ्तरों में एसी-कूलर चलने से खपत काफी बढ़ी है। कई घराें में ताे तीन-तीन कूलर चल रहे हैं। वहीं अस्पताल, हाेटल, बैंक अन्य दफ्तराें में एसी व कूलर चलने लगे हैं। एेसे में बिजली की खपत काफी बढ़ गई है। गर्मी के साथ यह और बढ़ेगी।

अफसर का तर्क- पकी फसल को चिंगारी से बचाने को लगा रहे कट
बिजली निगम के अधिकारियों का तर्क है कि फसल पक चुकी है। आग की चिंगारी न गिर जाए इसलिए बिजली के कट लगाए जा रहे हैं। मई-जून में बिजली की खपत 15 हजार मेगावाट से अधिक हाेने की आशंका है।

