
बड़े शहरों की तरह चंडीगढ़ में भी हीट आईलैंड बन रहे हैं, यानी वो इलाके जहां जमीन की सतह का तापमान ज्यादा रहता है। लेकिन चंडीगढ़ के वेदर पैटर्न को देखें तो एक चीज अच्छी है कि शहर के प्लान्ड हिस्सों में अनप्लान्ड हिस्सों के मुकाबले गर्मी कम रहती है।
हाल ही में प्रशासन के एनवायर्नमेंट डिपार्टमेंट के क्लाइमेट चेंज सेल की तरफ से की गई स्टडी में ये तथ्य सामने आए हैं। इस स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक शहर के इंटरनल सेक्टरों के मुकाबले साथ लगते राज्यों की बाउंड्री के साथ लगते इलाकों का तापमान ज्यादा रहता है, जिसे हीट आईलैंड का नाम दिया गया है। हालांकि बढ़ती गाड़ियों के चलते शहर के बीच में हीट आईलैंड बनने की आशंका थी, लेकिन स्टडी में पाया गया कि चंडीगढ़ के अंदरूनी हिस्से के बजाय बाहर के एरिया में तापमान ज्यादा रहता है।
केंद्र सरकार के निर्देशों पर सभी राज्यों व शहरों में क्लाइमेट चेंज एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। वेदर पैटर्न में बदलाव, हीट आईलैंड, बढ़ती गाड़ियां, फाॅरेस्ट लैंड, अर्बनाइजेशन और बाकी मुद्दों को लेकर ये एक्शन प्लान बन रहा है। इसको मंजूरी मिलने के बाद डिपार्टमेंट वाइज लागू किया जाएगा।
ये हैं चंडीगढ़ के हीट आईलैंड... चंडीगढ़ का नॉर्थ वेस्टर्न एरिया, ईस्ट का हिस्सा, साउथ और साउथ से ईस्ट तक का हिस्सा हीट आईलैंड में शामिल है। इनमें एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल एरिया (दोनों पार्ट), मनीमाजरा, मौलीजागरां, मलोया, धनास, डड्डूमाजरा, खुड्डा लाहौरा और कैंबवाला गांव आते हैं।
ये चंडीगढ़ के कूल एरिया... सुखना लेक के साथ लगते एरिया, दड़वा फाॅरेस्ट के साथ वाली बेल्ट, पंजाब यूनिवर्सिटी के बैकसाइड में फाॅरेस्ट बेल्ट, साउथ वेस्टर्न फाॅरेस्ट बेल्ट मोहाली तक और नेपली और कांसल फाॅरेस्ट में तापमान कम रहता है।

