
अरुणाचल प्रदेश के मेचुका में गुरु नानक देव तपस्थान को बौद्ध मंदिर में बदलने के शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के दावे को तब ठेस पहुंची, जब अल्पसंख्यक आयोग की बैठक में कोई सिख प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। जबकि गुरुद्वारे में बौद्ध मंदिर बनाए जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद SGPC ने ही केंद्र सरकार को इसकी जांच के लिए कहा था।

मीटिंग के जारी मिनट्स के अनुसार 18 मई को कन्वेंशन हॉल, टूरिस्ट लॉज, मेचुखा में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष कर्सी के. डेरबू और सदस्य रिनचेन ल्हामो की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें शि-योमी के उपायुक्त लियी बागरा, पुलिस अधीक्षक शि-योमी इराक बागरा और मेम्बा समुदाय, नेह नांग कल्चरल डेवलपमेंट सोसाइटी (NCDS) बौद्ध भिक्षुओं के अलावा मेचुखा क्षेत्र के विभिन्न गोम्पा भी उपस्थित थे। लेकिन इस बैठक में ना तो SGPC का कोई प्रतिनिधि पहुंचा और ना ही सिख समुदाय का पक्ष रखने के लिए कोई गया।
इस बैठक में मौजूद चीडेन गोइबा ने गुरुद्वारे पर SGPC के दावे को निराधार और अप्रामाणिक बताया। उन्होंने कहा कि यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि श्री गुरु नानक (1469-1539) ने कभी इस जगह का दौरा किया था। यह साबित करने के लिए सबूत हैं कि पवित्र मंदिर प्राचीन काल से मेचुखा घाटी में रहने वाले मेम्बा बौद्ध समुदाय का है।
मेम्बा आदिवासी पुराने समय से कर रहे पूजा
बैठक में पहुंचे नेह नांग कल्चरल डेवलपमेंट सोसाइटी के एक सदस्य चीडेन गोइबा का भी हवाला दिया गया। जिसमें कहा गया कि मेम्बा आदिवासी लोग नेह पेमा शेल्फू के पवित्र मंदिर की पूजा लंबे समय से कर रहे हैं। 8वीं शताब्दी (1274ई.) में क्षेत्र की खोज करते समय गुरु पद्मसंभव द्वारा पवित्र गुफा खोजी गई थी।
जमीन मालिक ने मांगा मुआवजा
इस बैठक में विवादित जमीन के मालिक गेबू ओंगे भी अल्पसंख्यक आयोग के आगे पेश हुए। उन्होंने इस दौरान इंडियन आर्मी से मुआवजे की मांग की। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने उनकी अनुमति के बिना यहां गुरुद्वारे की स्थापना की। उन्होंने ज्ञापन और शिकायतों को बार-बार जमा करवाया। जिसमें उन्होंने या तो गुरुद्वारा खाली करने या भूमि की क्षतिपूर्ति की अदायगी करने को कहा, लेकिन उनका दावा है कि इस कार्य में कोई प्रगति नहीं हुई।

अल्पसंख्यक आयोग ने इंसाफ का किया वादा
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष और सदस्य ने सभी के बयानों को ध्यान से सुना और आश्वासन दिया कि दोनों समुदायों के साथ अन्याय नहीं होगा और सच्चाई की जीत होगी। वे जल्द रिपोर्ट को उच्च अधिकारियों के सामने रखेंगे। इसके बाद अल्पसंख्यक आयोग ने विवादित जमीन का दौरा भी किया।
SGPC का दावा
22 अप्रैल को SGPC के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने धर्मांतरण को सिखों पर हमला और भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन करार दिया था। उन्होंने कहा था कि गुरु नानक देव ने विभिन्न देशों की धार्मिक यात्राएं की थीं, जिन्हें सिख इतिहास में उदासी कहा जाता है। उनकी मेचुका यात्रा का भी उल्लेख मिलता है।

इतिहासकार कर्नल दलविंदर सिंह ग्रेवाल ने मेचुका में इस गुरुद्वारे के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था और मार्च 1987 में भारतीय सेना के सहयोग से गुरुद्वारा साहिब को संगत (समुदाय) को सौंप दिया गया था। लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला है कि इस गुरुद्वारे को अब बौद्ध मंदिर में बदल दिया गया है।

