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Saturday, February 7, 2026
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दिव्यांग के लिए कानूनी अधिकार मौजूद:सुविधाएं हैं पर लाभ दिव्यांग बच्चों को नहीं मिल रहा, क्योंकि जिम्मेदारी को लेकर संवेदनाओं में कमी है

किसी दिव्यांग बच्चे को उसकी मानसिक अवस्था के चलते मौलिक शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। पंचकूला के एक स्कूल द्वारा बच्चे को स्कूल से निकाल लेने की अभिभावकों से की गई मांग के मामले पर सुनवाई करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि पुराने समय में सुविधाओं की कमी के चलते दिव्यांग छात्रों को आगे बढ़ने में समस्या आती थी लेकिन आज समय बदल गया है।

दिव्यांग के लिए कानूनी अधिकार मौजूद है। कोर्ट ने अफसोस जताते हुए कहा कि सुविधाएं होने के बावजूद इसका लाभ दिव्यांग बच्चों को नहीं मिल पा रहा। इसका कारण जिम्मेदारी को लेकर संवेदनाओं में कमी है। ऐसे में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए चंडीगढ़, पंजाब व हरियाणा तंत्र विकसित कर कोर्ट को इसकी जानकारी दें।

मामले पर 14 अगस्त के लिए अगली सुनवाई तय की गई है। सुनवाई के दौरान पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ की तरफ से कोर्ट को कहा गया कि स्कूल शिक्षा विभाग इस तरह की घटनाओं को ध्यान में रखकर जरूरी कदम उठा रहा है। ऐसे में उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया जाए।

डाउन सिंड्रोम पीड़ित 13 साल के बच्चे की मां ने दायर की है याचिका

दिव्यांग बच्चे की मां की तरफ से याचिका दायर कर कहा गया था कि उसका 13 साल का बेटा डाउन सिंड्रोम का शिकार है। वह पंचकूला के एक निजी स्कूल की स्पेशल विंग में पिछले पांच साल से पढ़ाई कर रहा था। स्कूल ने बाकी बच्चों की सुरक्षा की दलील देते हुए कहा कि वह बच्चे को स्कूल से निकाल लें।

हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि स्कूल का काम बच्चों को शिक्षा उपलब्ध करवाना है और राज्य का काम इसके लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध करवाना है। इस काम में भले ही मुश्किलें आएं लेकिन स्कूल और सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।

इससे पहले कोर्ट ने कहा था कि स्कूल व अधिकारियों के काम की निंदा होनी चाहिए। इस तरह की समस्या आने पर उसका समाधान निकाल कर राज्य व स्कूल को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, जबकि ऐसा नहीं किया गया। इस तरह की घटना दोबारा न हो इसके लिए कोर्ट ने इस मामले को जनहित याचिका के तौर पर सुनते हुए पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ से एक तंत्र विकसित करने को कहा है।

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