
रेवाड़ी में इंटीग्रेटिड कोऑपरेटिव डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईसीडीपी) में हुए गबन के बाद अब पूरे राज्य में इस योजना की ऑडिट की जाएगी। रेवाड़ी में गबन का मामला सामने आने के बाद कोऑपरेटिव विभाग के एसीएस टीवीएसएन प्रसाद ने दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है।
साथ ही, राज्य में वर्ष 2000 के बाद से राज्य में सभी आईसीडीपी योजनाओं के खातों की जांच के आदेश दे दिए हैं। यानी अब सभी योजनाओं की ऑडिट होगी। जिसमें और भी खुलासे हो सकते हैं, क्योंकि रेवाड़ी में सामने आए एक मामले के अनुसार, अधिकारियों व कर्मचारियों ने सरकारी खाते से 43 लाख 80 हजार रुपए का गबन करके जीरकपुर, मोहाली में फ्लैट खरीद लिया गया है।
एसीएस ने आदेश के अनुसार, ऑडिट में वर्ष 2000 से अब तक मिली राशि के साथ यह भी देखा जाएगा कि उसका उपयोग कितना व कहां हुआ। एसीएस ने डिप्टी चीफ ऑडिटर योगेंद्र अग्रवाल व जीएम अनु कौशिक को सस्पेंड किया है।
वहीं, लाखों रुपए गबन के मामले में आईसीडीपी के वर्तमान जीएम अनु कौशिक, पूर्व जीएम एवं डिप्टी चीफ ऑडिटर नितिन शर्मा व सहायक रजिस्ट्रार भी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। एसीबी ने 1.30 करोड़ रुपए के गबन मामले में 13 मई को आईसीडीपी के सहायक रजिस्ट्रार व जीएम को गिरफ्तार किया था।
हाल ही में आईसीडीपी में गबन की सूचना को विभाग ने गंभीरता से लेते हुए ऑडिट कराने का निर्णय लिया है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राज्य में 2000 के बाद की सभी आईसीडीपी योजनाओं का फॉरेंसिक ऑडिट किया जाएगा। उधर, आईसीडीपी केंद्र की स्कीम है।
इसके तहत पैक्स को मजबूत करने के लिए केंद्र से पैसा मिलता है। जिसमें 25 प्रतिशत पैसा सब्सिडी के रूप में तो 75 प्रतिशत पैसा लोन के रूप में मिलता है। इसी प्रकार राज्य सरकार की ओर से भी 50 प्रतिशत सब्सिडी और 50 प्रतिशत पैसा लोन के रूप में दिया जाता है।
ये है मामला…
एंटी करप्शन ब्यूरो गुड़गांव की टीम ने रेवाड़ी स्थित आईसीडीपी में लाखों रुपए के गबन के मामले में रविवार को अकाउंटेंट सुमित अग्रवाल गिरफ्तार किया था। इससे पहले शनिवार को गिरफ्तार किए डिप्टी चीफ ऑडिटर योगेन्द्र अग्रवाल व विकास अधिकारी नितिन शर्मा को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर भेजा गया।

