
राज्य में शहरी सरकार के चुनाव में अभी और देरी हो सकती है, क्योंकि सरकार अब नगर पालिकाओं से लेकर नगर निगमों में वार्डबंदी का फार्मूला बदल रही है। ऐसे में कहीं वार्डों की संख्या बढ़ सकती है तो कहीं घट सकती है।
पालिका और परिषदों में कम से कम 12 वार्ड होंगे, नगर निगमों में इनकी संख्या कम से कम 20 निर्धारित की जाएगी। इसमें परिवार पहचान पत्र के डेटा का इस्तेमाल होगा। सरकार की ओर से नगर निगमों के वार्डों की संख्या निर्धारित करते हुए अधिसूचना जारी की गई है।
10 हजार से कम आबादी वाली पालिकाओं में कम से कम 12 वार्ड होंगे। जबकि 3 लाख तक की आबादी वाली परिषदों में 32 वार्ड होंगे। इसी तरह 4 लाख से कम आबादी वाले नगर निगमों में 20 और 15 लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगम में 46 वार्ड होंगे। इधर, नगर पालिकाओं व नगर परिषदों के वार्डों को लेकर ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। वहीं, नगर निगमों में मेयर पद के लिए एससी और बीसी-ए को आरक्षण देने का फैसला लिया है।
पालिका व परिषद में वार्डों का फार्मूला
अब ऐसे बनेंगे: 10 हजार से कम आबादी वाली नपा में 12 वार्ड होंगे। इसके बाद हर 10 हजार की आबादी पर एक लाख तक 2-2 वार्ड बढ़ते जाएंगे। एक से तीन लाख आबादी होने पर भी 2 ही वार्ड बढ़ेंगे। वार्ड की अधिकतम संख्या 32 तक होगी।
पहले ऐसे बनते थे: 10 हजार से कम आबादी पर 11 वार्ड बनते हैं। फिर एक लाख तक आबादी पर हर 10 हजार पर 2-2 वार्ड बढ़ते हैं, लेकिन एक से 3 लाख तक आबादी होने पर भी 2 ही वार्ड बढ़ाए जाते हैं। अधिकतम 31 वार्ड बनते हैं।
नगर निगमों में वार्डों का फार्मूला
अब ऐसे बनेंगे: 4 लाख से कम आबादी वाले निगमों में 20 वार्ड होंगे। 10 लाख की आबादी तक हर 1 लाख तक पर 2-2 वार्ड बढ़ते जाएंगे। 10 से 12 लाख और 12 से 15 लाख तक की आबादी पर 4-4 वार्ड बढ़ेंगे। यानी 15 लाख की आबादी तक 40 वार्ड बनेंगे, जबकि 15 लाख से अधिक आबादी पर 46 वार्ड होंगे।
पहले ऐसे बनते थे: 4 लाख से कम आबादी पर 20 वार्ड बनते हैं। 10 लाख तक की आबादी पर हर एक लाख तक आबादी के अनुसार 2-2 वार्ड बढ़ते जाते हैं। 10 से 12 लाख की आबादी पर 3 और 12 से 15 लाख की आबादी पर 4 वार्ड बढ़ते हैं। 15 लाख से अधिक आबादी होने पर 45 वार्ड बनते हैं।
मेयर पद के लिए एससी-बीसी-ए को आरक्षण
एससी की आबादी के अनुपात में निगमों में मेयर, नपा व नप अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण मिलेगा। जबकि बीसी-ए को 8% आरक्षण मिलेगा, लेकिन कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगा। सबसे पहले संबंधित वर्ग के मेयर या पालिका व परिषद में आरक्षण मिलेगा। अगली बार आरक्षित वर्ग की इससे कम आबादी वाले नगर निकाय में आरक्षण दिया जाएगा। यह चक्र ऐसे चलेगा। इन्हीं वर्ग की महिलाओं का 33% कोटा होगा।

