
लेदर इंडस्ट्री जालंधर में इकलौता कारोबार है, जिसने सामाजिक-आर्थिक तरक्की में सबसे ज्यादा हिस्सेदार दी। साल 1934 में पारंपरिक तौर पर कच्चे चमड़े को रंगने का काम करने वालों के टैलेंट को अंग्रेजों ने पहचाना और लेदर का एक्सपोर्ट शुरू हुआ। पंजाब की ताजा इकनॉमिक सर्वे रिपोर्ट लेदर इंडस्ट्री के बड़े संकट की तरफ इशारा कर रही है।
इस रिपोर्ट के अनुसार लेदर मेन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ में 14.3 फीसदी की कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार टेक्सटाइल, फैबरिक,कंप्यटूर प्रोडक्ट जैसे सेक्टरों में ग्रोथ गिरी है, जिसमें सबसे ज्यादा गिरावट लेदर में है। जालंधर पंजाब का इकलौता लेदर मेन्युफैक्चरिंग हब है। यहां की इंडस्ट्री को लंबे समय से केंद्र व राज्य सरकार की मदद ना मिलने से संकट गहरा गया है।
पुराने कारोबारी चेता रहे हैं कि अब भी अगर व्यापक कदम न उठाए गए तो इस इंडस्ट्री का बीज नाश हो जाएगा।
जालंधर में कपूरथला रोड पर लेदर कांप्लेक्स स्थित है। यहां पर 1995 में लेदर इंडस्ट्री स्थापित हुई थी। यहां पर 50 यूनिटों के साथ शुरुआत हुई। इसके अलावा सीमित यूनिट कपूरथला, नालागढ़ में लगे। आज कारोबारी बताते हैं कि एक साथ इतनी मुसीबतें आ गईं कि संभलना मुश्किल हो गया है। फिनिश्ड लेदर तैयार करने के पहले की स्टेज का लेदर वैट ब्लू कहलाता है। ये सैमीफिनिश्ड लैदर होता है।
आज पुरानी कंपनियां बंगलादेश, इथोपिया जैसे देशों से वैट ब्लू मंगवा रही हैं। लेदर कांप्लेक्स में स्थापना के वक्त लगे यूनिटों में से एक के संचालक अमनदीप सिंह संधू कहते हैं – पहले पीपीसीबी ने वातावरण सरंक्षण नियमों के मामले में सवा साल से ज्यादा सीलिंग रखी। जिससे कारखाने बंद थे।
रोजगार हो नहीं रहा था व सभी कारखानों पर हर महीने बैंक कर्जों का ब्याज चढ़ रहा था। खरीददार दूसरी जगहों पर शिफ्ट हो रहे थे। जिन ग्राहकों से पैसा लेना था, वह दबाकर बैठ गए। फिर कोविड अा गया। जब इन दोनों संकटों से कुछ उभरने लगे तो यूक्रेन युद्ध के बाद केमिकल महंगे हो गए लेकिन ऑर्डर और भी घट गए। सरकार की मदद चाहिए।
फैक्टरी संचालकों ने पंजाब सरकार से की ये मांगें
1. वातावरण सरंक्षण मानक बहुत ज्यादा जटिल और महंगे हैं। सरकार मदद करे। 2. तकनीकी माहिरों व स्टाफ की भारी कमी है। 3. जालंधर में लेदर बनता है लेकिन लेदर से बाकी तमाम प्रोडक्ट बनाने के कारखाने ना के बराबर हैं, इन एसेंबलिंग यूनिटों की स्थापना हो। 4. लेदर इंडस्ट्री इकलौता सैक्टर है, जिसका कच्चा माल लाइव स्टाक से जुड़ा है। सरकार प्रोमोट करे।
असर इन पर भी है
- मशीनें रिपेयर करने वालों का रोजगार छिन रहा। कबाड़ में बेची जा रही।
- पानी गर्म करने वाले बॉयलर व बाकी मशीनरी की डिमांड गिर रही।
- लोकल केमिकल सप्लायरों का रोजगार संकट में।
- गांवों से मरे जानवर लाकर बेचने वालों पर संकट। लंपी स्किन की बिमारी के बाद संख्या घटी।
केंद्र से ये डिमांड
1.एक्सपोर्ट में जो इंसेटिव की मदद स्कीमें सीमित रह गई हैं, इन्हें विस्तार दिया जाए। 2.जीएसटी में रीबेट प्रदान करें। 3.लेदर प्रोडक्ट के एसेंबलिंग यूनिटों को प्रोमोट करे।

