
परकाश सिंह बादल ने सीएम रहते हुए अपने अंदाज में जो काम किए, इनके किस्से मंगलवार को याद किए गए। उनके 5 बार से सीएम शिप के कार्यकाल में खेती, ग्रामीण विकास व शहरी विकास के लिए अनगिनत योजनाएं आईं, लेकिन इनमें जालंधर के लोगों की दिक्कतों को सुलझाने के उनके तौर तरीकों को आज भी याद किया जाता है।
साल 2007 में अकाली-भाजपा सरकार बनी। चुनाव मेनिफेस्टो में शिरोमणि अकाली दल बादल ने उस समय वादा किया था कि खेतीबाड़ी की जमीन पर हर प्रकार की इंडस्ट्री स्थापित करने की आज्ञा होगी। उद्योग नगर मेन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रेसिडेंट तेजिंदर सिंह भसीन बताते हैं कि पहले नियम था कि खेतीबाड़ी की जमीन पर वही कारखाना लगेगा तो खेतीबाड़ी से संबंधित होगा।
जालंधर में गांव गदईपुर की जमीन पर जो कारखाने लगे थे, उन्हें नोटिस आए कि कारखाने बंद करें। जब सरकार बनी तो एक दिन सुबह 7 बजे प्रशासन से हमें फोन कॉल आए कि सीएम परकाश सिंह बादल गदईपुर आ रहे हैं।
हम तुरंत सीनियर व युवा सदस्यों के साथ वहां पहुंचे। सीएम बादल ने कहा कि वह कारखाने देखकर पूरा मामला समझना चाहते हैं। इसके कुछ हफ्ते बाद सरकार ने नियम बदल दिया। इस तरह गदईपुर में कारखानों को नोटिस आने बंद हो गए। बाद में टाउन प्लानिंग में गदईपुर जैसे इलाकों को इंडस्ट्रियल जोन बनाया गया।
विदेश बसे पंजाबियों की ताकत पहचानी, जालंधर को दोआबा में प्राथमिकता पर रखा
साल 1996 में जालंधर में एनआरआई सभा का गठन हुआ। इसका गठन विदेश बसे पंजाबियों की सरकारी दफ्तरों में सुनवाई को पुख्ता बनाना था। इस समय इस एनजीअो ने परकाश सिंह बादल को मुख्यमंत्री होते हुए सभा का पैट्रन बनाया गया।
इसके बाद सभा को डिविजनल कमिश्नर रेजिडेंस में एक सरकारी इमारत प्रदान की गई। डिवीजनल कमिश्नर व डीसी इसके पदाधिकारी बनाए गए। सभा में एक शिकायत निवारण सेल बनाया। यहां पर आए लोग सभी की लेटर लेकर सरकारी ऑफ़िस जाते व उनकी सुनवाई हो जाती।
इसके बाद विदेश बसे पंजाबियों को अपने गांवों व समाज में विकास कार्यों में हिस्सेदार बनने के लिए प्रेरित किया गया। जिसके बाद एनआरआई कोर्ट, एनआरआई थाने से लेकर अब अलग विभाग बना। परकाश सिंह बादल ने जालंधर को दोआबा में पहली प्राथमिकता में रखा।
यही वजह है कि दो बार 100-100 करोड़ के जंबो पैकेज प्रदान किए। जालंधर में संघ की गतिविधियों में अकाली दल के साथ गठबंधन के बाद इजाफा हुअा। जालंधर में मेयरशिप हमेशा भाजपा के पास रही। वह जालंधर कैंट के नेताअों को लगातार मिलते थे।

