
नशा वर्तमान समाज की सबसे बड़ी समस्या है। इससे लोगों को निजात दिलाने के लिए सरकारी तथा गैर सरकारी तौर पर तमाम प्रयास हो रहे हैं। इसी में शुमार है गुरु रामदास एजुकेशनल सोसायटी जो अब सरकारी मेडिकल कॉलेज में चलने वाले स्वामी विवेकानंद नशा छुड़ाऊ केंद्र में सेवा के इस काम में सहयोग करेगी। फिलहाल संस्था ने काम शुरू भी कर दिया है। बताते चलें कि यह वह संस्था है जिसने अपने वजूद में आने से लेकर आज तक 17000 से अधिक पीड़ितों को नशामुक्ति केंद्र पहुंचाया और इसमें से 2000 के करीब एेसे रहे हैं जो नशा छोड़ आम जिंदगी जीने लगे।
खुद हुए पीड़ित तो दूसरों की मदद को आए आगे
कहते हैं कि जा तन लागे वा तन जाने और न जाने कोय, की कहावत जतिंदर पाल सिंह गोलू पर खरी उतरती है। यह वह व्यक्ति हैं जो कभी खुद इस समस्या से ग्रस्त हो गए थे। इसके लिए अपना काफी कुछ बर्बाद किया, लेकिन परिजनों की मेहनत और उनके आत्मबल ने इस कोढ़ से उनको निजात दिलाया। खैर, जतिंदर बताते हैं कि ठीक होने के बाद उन्होंने सूर्या नामक संस्था साल 2000 में शुरू की। इसके अधीन पीड़ितों को काउंसलिंग करने के साथ-साथ उनको नशा छुड़ाऊ केंद्रों में भेजने लगे। साल 2013 तक इसके जरिए 6000 लोगों को इलाज के रास्ते पर लाया गया।
अब मिली नई जिम्मेदारी : प्रधान गुरकंवर सिंह, महासचिव मनप्रीत सिंह और उपाध्यक्ष जतिंदर पाल सिंह गोलू ने बताया कि सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेज में संचालित स्वामी विवेकानंद नशा छुड़ाऊ केंद्र के लिए उनकी संस्था को सहयोग के लिए शामिल किया है। इसके लिए उनकी पूरी टीम जुड़ गई है। वैसे तो यहां पर कॉलेज की तरफ से पहले से काम हो रहा है लेकिन अब वह लोग मरीजों को यहां लाने, उनकी काउंसलिंग तथा दवाओं का बंदोबस्त भी करेंगे। गोलू ने बताया कि इस केंद्र से ठीक होने वाले युवाओं के पुनर्वास और स्किल डेवलपमेंट के लिए भी योजना बनाई जा रही है।

