
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कोरोना काल में लॉकडाउन से बच्चों की संख्या 3.66 लाख बढ़ी थी। अब इनमें से 1.44 लाख विद्यार्थी घट गए हैं। इन विद्यार्थियों ने दोबारा निजी स्कूलों में दाखिला ले लिया है। अब स्कूलों में नए एडमिशन को लेकर प्रक्रिया शुरू होगी।
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटने पर स्कूल मुखियाओं की जिम्मेदारी तय करने की तैयारी चल रही है। शिक्षा विभाग की योजना है कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाई जाए, जो टीचर्स विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाएंगे, उनको सम्मानित भी किया जाएगा।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 8वीं से 11वीं कक्षा तक ड्रॉप आउट ज्यादा होता है। इसे रोकने की तैयारी है। हरियाणा में 6 से 10 साल की उम्र में दाखिलों का अनुपात 95.7% है, जबकि देशभर का औसत अनुपात 99.1% है। हरियाणा का ग्रोस एनरोलमेंट रेश्यो 104% है।
नेट एनरोलमेंट रेश्यो 82% है। एडजस्टेड एनईआर 95.7% है। अपर प्राइमरी में 11 से 13 साल की आयु का हरियाणा में एनरोलमेंट 98.7% है। देशभर का औसत 92.2% है। एलिमेंटरी में 6 से 13 साल की आयु तक 97.7% है। सेकेंडरी लेवल पर 15 से 16 वर्ष की आयु में 88.8% है।
दाखिले बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग के प्रयास
- ड्राॅप आउट रोकने के लिए हर बच्चा जिसने पांचवीं कक्षा पास की है, उसका नामांकन अगले विद्यालय में सुनिश्चित करना प्राथमिक स्कूल का दायित्व है।
- आठवीं पास करने वाले हर विद्यार्थी का 9वीं में दाखिला हो, यह सुनिश्चित किया जा रहा है।
- 9वीं व 11वीं में फेल हुए विद्यार्थी का ड्रॉप आउट न हो, इसके लिए विभाग ने 25 मई को दोबारा परीक्षा लेने के निर्देश दिए हैं।
- परिवार पहचान पत्र के जरिए हर ऐसे बच्चे का डेटा लिया जा रहा है, जो स्कूल से बाहर है।

