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Saturday, January 31, 2026
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जालंधर उपचुनाव में मान मनौवल का खेल:CM ने डैमेज कंट्रोल के लिए कर्मचारियों संगठनों से की बैठकें, सभी को पैनल मीटिंग का आश्वासन

मुख्यमंत्री के साथ ईटीटी अध्यापक यूनियन के पदाधिकारी मुख्यमंत्री और आप प्रत्याशी सुशील रिंकू के साथ - Dainik Bhaskar
मुख्यमंत्री के साथ ईटीटी अध्यापक यूनियन के पदाधिकारी मुख्यमंत्री और आप प्रत्याशी सुशील रिंकू के साथ

जालंधर लोकसभा उपचुनाव के बीच अपनी मांगों को लेकर विभिन्न विभागों के कर्मचारियों का रोष बढ़ता जा रहा था। शहर में राजनीतिक गतिविधियों से ज्यादा कर्मचारियों की गतिविधियां हो गई थीं। विभिन्न कर्मचारी संगठन शहर में रोष रैलियां निकाल रहे थे, धरने प्रदर्शन कर रहे थे। इससे सरकार की किरकिरी भी हो रही थी।

किरकिरी से बचने और डैमेज कंट्रोल के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मान मनौवल का खेल शुरू करते हुए बैठकों का फॉर्मूला निकाला।

मुख्यमंत्री को अपना मांगपत्र सौंपते रोडवेज के कर्मचारी
मुख्यमंत्री को अपना मांगपत्र सौंपते रोडवेज के कर्मचारी

पिछले कल फगवाड़ा के होटल कबाना में मुख्यमंत्री ने करीब 12 से 13 कर्मचारी संगठनों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें की। सभी की मांगों को गौर से सुना और उसके बाद सभी को एक ही पैनल मीटिंग का आश्वासन दिया।

सीएम को भी पता सबसे बड़े वर्ग को नाराज करना ठीक नहीं
मुख्यमंत्री को भी पता है कि चुनाव में कर्मचारी वर्ग अपनी अहम भूमिका निभाता है। इन्हें नाराज करना ठीक नहीं। इसलिए मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों को शांत करने के लिए दिनभर उनके साथ बैठकें की। बता दें कि कर्मचारी वर्ग ही किसी राज्य में ऐसा वर्ग होता है जो सरकारें बनाता भी है और गिराता भी है। क्योंकि यह वर्ग संगठित होता है और एक तरफा ही चलता है।

पिछली सरकारों को भी भुगतना पड़ा है नाराजगी का खामियाजा
पिछली सरकार चाहे वह अकाली दल-भाजपा की हो या फिर कांग्रेस की, इन्हें गिराने में कर्मचारियों ने ही अपनी अहम भूमिका निभाई थी। अकाली दल-भाजपा की सरकार में कर्मचारियों को पक्का करने के लिए अंतिम समय में बिल लाया गया, लेकिन बना कुछ नहीं। इसका खामियाजा सरकार को मतदान में भुगतना पड़ा।

यही हाल चन्नी की तीन महीने की सरकार में हुआ। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कर्मचारियों को पक्के करने का आश्वासन दिया. लेकिन अकाली दल-भाजपा गठबंधन की सरकार ने जो पॉलिसी बनाई थी उसे रद कर दिया और अपनी नई पॉलिसी तैयार नहीं की। बैठकें ही होती रहीं। चन्नी ने पॉलिसी तैयार की तो राज्यपाल ने उस पर आपत्तियां लगा दीं। इसका पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा।

अब मौजूदा सरकार ने कर्मचारियों को पक्का करने के लिए पॉलिसी बनाई है। उसे इम्प्लीमेन्ट भी कर दिया है, लेकिन अभी तक शर्तें पूरी कर दिए जाने के बाद भी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र नहीं मिले हैं। जबकि सरकार दावे कर रही है कि शिक्षा विभाग से रेगुलराइजेशन पॉलिसी की शुरुआत करते हुए कच्चा स्टाफ पक्का कर दिया है, लेकिन कर्मचारी नियुक्ति पत्र मांग रहे हैं।

​​​बैठकों के चक्कर में लेट हो गया रोड शो
होटल कबाना में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के नेताओं के साथ बैठकों और उनकी मांगों को सुनने के चक्कर में जालंधर शहर में रखा रोड शो पूरे साढ़े तीन घंटे लेट हो गया। जालंधर वेस्ट से शुरू होने वाला पहला रोड शो साढ़े 6 बजे शुरू हो पाया। मुख्यमंत्री वेस्ट हल्के के बाद जालंधर सेंट्रल और नॉर्थ हल्के में देर रात तक रोड शो करते रहे।

जालंधर में रोड शो निकालते सीएम भगवंत मान।
जालंधर में रोड शो निकालते सीएम भगवंत मान।

सीएम बोले- भरोसा रखें सभी मांगे पूरी करेंगे
रोड शो के दौरान भी कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का पीछा नहीं छोड़ा। रेलवे रोड पर फिर कुछ कर्मचारी संगठन जिनसे मुख्यमंत्री की बैठक नहीं हो पाई थी वह अपनी मांगों को लेकर पहुंच गए। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों का मांग पत्र लिया और कहा कि थोड़ा सब्र करें कानूनी अड़चनों के कारण मामले फंस रहे हैं। भरोसा रखें सभी मांगे पूरी करेंगे।

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