
नौजवानों को विदेश भेजने का झांसा देकर लाखों रुपए की ठगी करने वाले एक ट्रैवल एजेंट के साथी को पीड़ित युवकों ने खुद काबू कर पुलिस के हवाले किया, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई करने की बजाए मामला एक-दूसरे थाने का बताते रहे। इसके बाद पीड़ित युवकों ने थक हार कर उक्त एजेंट को छोड़ दिया। पीड़ित युवकों का कहना था कि अगर हमारी शिकायत पर पुलिस ही कार्रवाई नहीं कर रही, तो हम क्या कर सकते हैं।
वहीं, दूसरी तरफ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी के खिलाफ मामला दर्ज होने तक उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। जानकारी के मुताबिक 5 अप्रैल को युवकों ने एसएसपी को ट्रैवल एजेंट की तरफ से की गई धोखाधड़ी संबंधी शिकायत दी थी। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। डीएसपी सिटी रिपुतापन ने बताया कि जब तक किसी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं होता तब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकती। यह मामला उनके ध्यान में है। मामले की जांच एसपी स्पेशल ब्रांच कर रहे हैं।
पीड़ित युवक बोले-पहले भी चकमा देकर भाग चुका आरोपी
ट्रैवल एजेंट के साथी को पकड़कर थाना सिटी पहुंचे सर्बजीत सिंह, अभिनव शर्मा, राकेश कुमार, मनदीप सिंह, बलविन्दर सिंह आदि ने बताया कि 5 अप्रैल को उन्होंने ट्रैवल एजेंट के ऑफिस में पहुंचकर उसे काबू किया था, लेकिन वो वहां से उन्हें चकमा देकर फरार हो गया था। मंगलवार शाम हमें पता चला कि वो गुरदासपुर के काहनूवान चौक में घूम रहा है। इस पर हम लोगों ने रात करीब 9 बजे उसे काबू कर लिया। पीड़ित युवकों ने बताया कि वो पहले एजेंट को लेकर बरियार चौकी पहुंचे, तो वहां पर तैनात पुलिस कर्मचारियों ने कहा कि यह मामला थाना सिटी का है।
जब हम लोग थाना सिटी पहुंचे, तो वहां भी यही जवाब मिला कि यह मामला बरियार चौकी का है। इस पर हमने एक डीएसपी को भी फोन किया। उन्होंने कहा कि आप लोग सुबह 9 बजे उनके ऑफिस पहुंचकर शिकायत करें। उसके बाद कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि जब पुलिस अधिकारियों ने हमारी सुनवाई नहीं की तो मजबूरन हमें एजेंट को छोड़ना पड़ा।
आरोपी बोला-
मेरा काम बस पैसे इकट्ठे करना था
ट्रैवल एजेंट के साथी रवनीत रंधावा ने बताया कि वो इमीग्रेशन सेंटर में काम करता है, जबकि उसके 3 मालिक 2 संधू और एक शर्मा हैं। उसने माना कि उसने युवकों से पैसे लिए हैं, लेकिन उसने वो पैसे अपने मालिकों को दे दिए हैं। उसके अनुसार अभी तक सिर्फ 39 से 40 युवकों से पैसे लिए हैं। उससे कहा गया था कि वो पेपर वर्क कोई नहीं करेगा सिर्फ लोगों से पेमेंट इकट्ठी करनी है। जबकि पैसे इकट्ठे करके मैं दोनों संधुओं को ही देता था। यह लोग उसे सिर्फ अमृतसर में ही मिलते थे। जो वीजे लोगों को दिए जाते थे, वो इंटरनेट पर चेक करने पर सही लगते थे, लेकिन जो टिकट करवाई गई थी, वो फेक लग रही थीं।

