
सरकार ने नशा छुड़ाओ केंद्रों में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। कौन से सेंटर से कितने मरीज रोजाना आते हैं, कितने दूर गांवों से आते हैं, इनमें महिलाओं की संख्या कितनी है, केंद्रों में स्टाफ की क्या स्थिति है।
नशा छुड़ाने की गोलियों का स्टॉक कब और कितना आता है, केंद्रों में कौन सा बदलाव किया जा सकता है। इन सब पहलुओं को लेकर राज्य के सभी नशा छुड़ाओ केंद्रों का रिव्यू शुरू हो गया है। आप सरकार का यह पहला रिव्यू है।
सेहत विभाग के अनुसार, नशा छुड़ाओ केंदों से नशा छुड़ाने की गोलियों की लीकेज, फर्जी एडमिट, बिना लाइसेंस खुले नशा छुड़ाओ केंद्रों को लेकर शिकायतें आ रही थीं। अब इन सेंटरों में रिव्यू के अनुसार ही सुविधा और एक्शन होगा। राज्य में 478 ओओएट सेंटर व 183 डी एडिक्शन सेंटर है।
रिव्यू के बाद नशा छुड़ाओ केंद्रों में बदलाव होगा। गोलियों की लीकेज कहां से होती है, कैसे रोकना है, अवैध नशा छुड़ाओ केंद्रों पर कैसे कार्रवाई करनी है इसका रिव्यू होगा। सभी केंद्रों का कंट्रोल हेड ऑफिस से होगा, सीसीटीवी, बॉयोमैट्रिक से पंजीकरण हर मरीज का आधार कार्ड से लिंक होगा।
– डा. संदीप सिंह गिल, असिस्टेंट डायरेक्टर हेड ओओएट पंजाब
सेंटर्स पर आए हर मरीज का आधार कार्ड लिंक होगा
राज्य में 478 ओओएट सेंटरों में 2.65 लाख मरीज और 183 डी एडिक्शन सेंटरों में 6.10 लाख मरीज रजिस्टर्ड हैं। लेकिन इसके बावजूद सेहत विभाग को नशा छुड़ाने की गोलियों की लीकेज, फर्जी एडमिट की शिकायतें आ रही थी।
कई जगह इन गोलियों को ब्लैक में बेचने, नशे के टीके के तौर पर इस्तेमाल करने के मामले भी सामने आए। लेकिन अब इन सेंटरों का पूरा कंट्रोल हेड ऑफिस पर होगा। हर सेंटर में सीसीटीवी कैमरे, बॉयोमैट्रिक से पंजीकरण, हर मरीज का आधार कार्ड लिंक होगा।
बिना लाइसेंस वाले केंद्रों पर एक्शन...घरों में बिना लाइसेंस खुले नशा छुड़ाओ केंद्रों की शिकायतें आ रही थी। अमृतपाल सिंह के गांव में खुला केंद्र इसका सबूत है। ऐसे और भी अवैध केंद्र होने की शिकायतें हैं। जहां युवाओं को पीटा जाता है।
गांवों में भी हो रहा नशे का सर्वे
गांव में कितने लोग नशा करते हैं, नशा कौन सा है, कब से कर रहे हैं, उनका क्राइम रिकॉर्ड क्या है। इसको लेकर हर गांव से सर्वे भी हो रहा है। यह सर्वे नशा छुड़ाओ केंद्रों के रिव्यू का हिस्सा है।

